बिहार के जादवा/जदुवंशी/ जादों राजपूतों का ऐतिहासिक शोध ——
बिहार के भागलपुर ,मुंगेर ,बांका,पूर्णयाँ तथा जमुही ,सुल्तानगंज जिलों में पाये जाते है जादौन राजपूत —–
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र के गांवों से था बिहार के जादौन राजपूतों का विस्थापन —–
वैसे बिहार के इन जिलों में पाये जाने वाले सभी जादौन राजपूतों का मूल स्थान उनके बुजर्गों के बताये गांवों के अनुसार सबलगढ़ क्षेत्र से है।ये गांव मुख्यतः राजा की तौर ,रूपा की तौर , तथा बाला की तौर एवं अन्य पास के ही ठिकानों से विस्थापित हुए है।यह विस्थापन बहुत अधिक पुराना नहीं है।ये भारत में अंग्रेजों के आगमन या इससे थोड़ा पूर्व का हो सकता है।
बिहार के जादौन राजपूत करौली के राजा गोपाल दास के पुत्र मुकटराव के वंशज मुक्तावत शाखा से है—–
महाराजा गोपाल दास अपने बाबा चन्द्रसेन के समय में ही सन 1553ई0 में गद्दी पर बैठे।इनका राज्यभिषेक तिमनगढ़ दुर्ग में हुआ था।ये बहुत बलवान एवं धर्मशाली राजा थे।अकबर इनसे बहुत प्रभावित रहता था।आगरा के लाल किले की नीव इनके हाथों से ही अकबर ने रख वायी थी।इन्होंने करौली में बहुत विकास कार्य किये।गोपाल मन्दिर भी बनवाया।गोपालदास के पुत्रों में से उल्लेखनीय 2पुत्र , मुक्तराव और तुरसम बहादुर थे।मुक्तराव से मुक्तावत शाखा निकली जिसमें सरमथुरा ,झीरी और सबलगढ़ के जादौन राजपूत है।बिहार के इन 5 जिलों में।पाये जाने वाले सभी जादौन राजपूत सबलगढ़ के ही मुक्तावत शाखा के वंशज है जिनके पूर्वज लगभग 10 या 12 पीढ़ी पहले इस क्षेत्र से विस्थापित होकर बिहार के इस क्षेत्र में चले गए होंगे।सम्भवतः इनका विस्थापन 1857 ई0 के स्वतंत्रता संग्राम से कुछ पूर्व या बाद का हो।
बिहार प्रान्त में जादों राजपूतों के गांव—-
1-बांका जिला—
1-रामचुआ ,2-राजा तोड़ ,3- कुरमा , 4-रायपुरा,5- चटमा 6-डीह, 7-गुलनी, 8-सोहरा, 9-बिन्डी,10- लहोरिया, 11-महमदपुर, 12-केनोलिया,13-डफलपुर, 14-गुरुधाम ,15-अलीगंज 16-बांका ,17- परसंडो,18-धौरी, 19-तेरासी,20-राजवाड़ा, 21-नबगांव ,22-बहुरना,23- पकरिया, 24-बाराहाट,25-मोहनपुर,26- पैर, 27-मकेशर.।
2-मुंगेर जिला-
28-लोगाय , 28-रामपुर ,30-सोहरा ,31-गोगड़ी ,32-जमालपुर
3-जमुई जिला-
33-बाघाखेड़ा
4-सुल्तानगंज जिला-
34-मानिकपुर
5-भागलपुर-
35-बक्चप्पर ,36-तैरासी
6पूर्णिया जिला-
37 -मल्लडीहा
अभी बांका जिले की अमरपुर तहसील के गांव रमचुआ में स्थापित किया है इन्होंने अपनी कुलदेवी कैला मैया का मन्दिर—–
अभी हाल के दिनों में ही इन जादौन राजपूतों ने करौली की कैला मैया को अपनी कुल देवी मानते हुए एक भव्य मंदिर सामूहिक प्रयास से बना कर कैला मैया की मूर्ति स्थापित की है।हालांकि कैला मैया जादौन की कुलदेवी नहीं है।वैसे जादौन की कुलदेवी योगेश्वरी देवी या योगमाया जी है जिन्होंने कंस के हाथों से छूट कर भगवान श्री कृष्ण जी की रक्षा की थी।
।धन्यवाद।
जय यदुवंश ।।जय श्री कृष्णा।।
लेखक–डा0 धीरेन्द्र सिंह जादौन
गांव -लाढोता ,सासनी ,जिला-हाथरस,उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा
( राष्ट्रीयअध्यक्ष ,राजा दिग्विजय सिंह जी वांकानेर)