ऐतिहासिक नगर सवाईमाधोपुर के दार्शनिक स्थलों का अवलोकन–

ऐतिहासिक नगर सवाईमाधोपुर परिक्षेत्र के दार्शनिक स्थल— मूलरूप से माधोपुर के नाम से प्रसिद्ध सवाईमाधोपुर राजस्थान का एक खूबसूरत पौराणिक नगर है।राज्य के अन्य प्रसिद्ध स्थानों की तरह यहां भी हिन्दुस्तान के गौरवशाली अतीत को महसूस कर सकते हैं ।इस प्राचीन नगर के आस-पास कई ऐतिहासिक स्मारक ,खण्डहर एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं जो पर्यटकों […]

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The meaning of Rajput community word Jadon Tribe (जादों)—-

Meaning of the Rajput community word Jádon Tribe (जादों )—– Classically, Yadu, or Yádava, a tribe of Rajputs of the Chandarbans division, who profess to trace their origin in a direct line from Krishna of Vrishni branch of Yadavas. Yadu is the patronymic of all the descendants of Buddha, the ancestor of the Lunar race,

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मथुरा के प्राचीन पौराणिक यदुवंशी जादों क्षत्रिय राजवंश का ऐतिहासिक अवलोकन

मथुरा के प्राचीन पौराणिक यदुवंशी जादों क्षत्रिय राजवंश का ऐतिहासिक अवलोकन —– श्री कृष्ण के पूर्व शूरसेन जनपद पर जिन राजवंशों ने शासन किया उनके सम्बन्ध में कुछ विवरण पौराणिक तथा अन्य साहित्य में मिलते हैं। सबसे प्राचीन सूर्यवंश मिलता है, जिसके प्रथम राजा-वैवस्वत मनु से इस वंश की परम्परा मानी गयी है। मनु के

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ब्रज जनपद के जादों (प्राचीन यादव ) कुलीन राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन —

ब्रज जनपद के जादों (प्राचीन यादव )कुलीन राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन — मुस्लिम धर्म के प्रसार व प्रचार के समय भारत की पश्चिमोत्तर सीमाओं पर यादव कुलीन परिवार आबाद थे और इन परिवारों ने मुस्लिम साम्राज्यवादियों की प्रगति को दीर्घकाल तक रोकने में सफलता प्राप्त की। अन्त में यदुवंशी भाटी राजपूतों ने सिन्ध अथवा पंजाब

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दास्ताने पूर्व मध्यकालीन जादों राजवंश का बयाना (विजयमन्दिरगढ़ ) किला–

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करौली के जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य ,वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक है मध्यकालीन ऐतिहासिक दुर्ग तिमनगढ़ (ताहनगढ़ )—

करौली जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य , वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक  ऐतिहासिक मध्यकालीन  दुर्ग तिमनगढ़(ताहनगढ़)—- “अपनी बहुमूल्य सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर तथा यदुवंशियों के मुगलों से वीरतापूर्ण गौरवशाली  संघर्ष के इतिहास का प्रतीक है तिमनगढ़ /ताहनगढ़ दुर्ग “।इसे तत्कालीन इतिहासकारों एवं लेखकों ने विभिन्न नामों तमनगढ़ , त्रिभुवनगढ़ ,थंनगढ़ से वर्णित किया है

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मध्यकालीन जादों राजपूत दुर्ग तिमनगढ़ के गौरवशाली स्वर्णिम युग का ऐतिहासिक अध्ययन–

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पूर्व-मध्यकालीन ऐतिहासिक मंडरायल दुर्ग यदुवंशियों के शौर्य एवं वीरता का प्रतीक–

पूर्व मध्यकालीन मंडरायल दुर्ग यदुवंशियों के शौर्य एवं वीरता का प्रतीक  — मंडरायल दुर्ग ई0 1145 से 1423 ई0 तक यदुवंशी जादों राजवंश की राजधानी रहा ।यह दुर्ग चम्बल नदी की सीमा पर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। मंडरायल नगर  करौली जिला मुख्यालय  से 40 कि. मी. चम्बल नदी की सीमा पर दक्षिण पूर्व

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पुरातन सम्पदा का अमूल्य खजाना है जदुवंशियों की ऐतिहासिक धरोहर तिमनगढ़ दुर्ग–

पुरातन सम्पदा का अमूल्य खजाना है जदुवंशियों की ऐतिहासिक धरोहर तिमनगढ़ दुर्ग — जदुवंशी क्षत्रियों का मध्यकालीन यह तिमनगढ़ दुर्ग राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है । पाषाण की मूर्तियों के अमिट खजाने और हस्तशिल्प कला के बेजोड़ नमूनों के लिए तिमनगढ़ का किला प्रसिद्ध है। यह किला जिला मुख्यालय करौली से 40 किमी. की

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सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़ —

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक  मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़— बयान से लगभग 23 कि.मी दक्षिण में एक उन्नत पर्वतशिखर पर मध्यकाल प्रसिद्ध दुर्ग ताहनगढ़  (तिमनगढ़) या त्रिभुवनगढ़ स्थित है। दुर्गम पर्वतमालाओं से आवृत , वन सम्पदा  से परिपूर्ण तथा नैसर्गिक सौन्दर्य से सुशोभित इस दुर्भेद्य दुर्ग की अपनी अदभुत निराली ही  शान

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