दास्ताने पारस पत्थर ,नटनी की छतरी एवं वीराने खण्डहर दुर्ग तिमनगढ़–

दास्ताने पारस पत्थर , नटनी की छतरी एवं वीराने खण्डहर दुर्ग तिमनगढ़– बयाना के यदुवंशी  महाराजा विजयपाल की मृत्यु के बाद यादव राजवंश छिन्न -भिन्न हो गया ।इनके पुत्र छोटे -छोटे दल बना कर इधर -उधर डोलने लगे , परन्तु कहीं पर उपर्युक्त स्थान नहीं मिला ।कुछ को अपना राज्य जमाने का अवसर मिल गया […]

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मध्यकालीन त्रिभुवनगिरि दुर्ग का गौरवशाली स्वर्णिम युग:सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक —

मध्यकालीन  त्रिभुवनगिरि दुर्ग का गौरवशाली स्वर्णिम युग : सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक — त्रिभुवनगिरि दुर्ग –इस मध्यकालीन दुर्ग का निर्माता महाराजाधिराज त्रिभुवनपाल या तिहुणपाल के नाम पर ही “त्रिभुवनगिरि “रखा गया है ।इस दुर्ग को ताहनगढ़ , तिमनगढ़ ,थनगढ़ , थनगिरि आदि नामों से भी जाना जाता है ।जैसवाल जैन जैसलमेर का त्याग

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मध्यकालीन तिमनगढ़ दुर्ग के गौरवशाली स्वर्णिमयुग का ऐतिहासिक अध्ययन —

मध्यकालीन तिमनगढ़ दुर्ग के गौरवशाली स्वर्णिम युग  का ऐतिहासिक अध्ययन—- यहां के यादव /यदुवंशी  क्षत्रिय राजा शूरसेन जनपद (प्राचीन मथुरा राज्य ) के उन चन्द्रवँशी यादवों के वंशज थे जिनके नेता श्री कृष्ण थे । सन 1146 ई0 के लगभग त्रिभुवनगढ़ में श्री जिनचंद्र सूरि पधारे थे ।त्रिभुवनगिरि के यादव राजा कुँवरपाल ने जैनमुनि जिनदत्त

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करौली राज्य के प्राचीन उंटगिरि दुर्ग का ऐतिहासिक अवलोकन —

करौली राज्य के प्राचीन दुर्ग उंटगिरि का  ऐतिहासिक अवलोकन — करौली क्षेत्र में उतगिरि के किले को मध्यकालीन राजपूताने के विशाल दुर्गों में माना जाता है ।यह दुर्ग घने जंगल के भीतरी भाग में स्थित है ।दुर्ग के आस -पास कोई भी  वस्ती की बसावट नहीं है।जंगली क्षेत्र को पार करके दुर्ग तक पहुंचना बड़ा

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करौली राज्य के मंडरायल दुर्ग का गौरवमयी इतिहास —

करौली राज्य के प्राचीन दुर्ग मंडरायल  का गौरवमयी इतिहास —- जादों राजपूतों की करौली रियासत के अंतर्गत  ‎मंडरायल का दुर्ग पूर्व-मध्यकाल का एक प्रसिद्ध दुर्ग रहा है।यह किला मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के सीमांत प्रदेश पर स्थित है।चम्बल नदी के किनारे यह एक उन्नत पहाड़ी के शिखर भू-भाग पर स्थित है।इसका  निर्माण लाल पत्थरों से हुआ

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करौली में यादवा (आधुनिक जादों ) राज्य की स्थापना , संस्थापक एवं तत्कालीन यदुवंशी शासक —

करौली में  यादवा ( आधुनिक जादों )राज्य की स्थापना  ,संस्थापक एवं तत्कालीन यदुवंशी शासक —- “श्री कृष्ण के वंशज यदुवंशी नरेश अर्जुन पाल देव द्वारा सन 1348 ई0 में स्थापित पूर्व देशी रियासत करौली अपने स्वर्णिम अतीत को समेटे हुये अपनी स्थापना के 670 वर्षों को व्यतीत कर चुकी है ।इस अवधि में 27 राजा

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ब्रज (शूरसेन प्रदेश ) के मध्यकालीन यादवा कुलीन जादों ठाकुरों के वंश विस्तार का ऐतिहासिक अध्ययन —

ब्रज (शूरसेन प्रदेश ) के  मध्यकालीन यादवा  कुलीन जादों ठाकुरों के वंश-विस्तार का ऐतिहासिक अध्ययन —– यादवों के राजवंशीय इतिहास के लिए सूचना के मुख्य स्रोत पुराण ,महाकाव्य और जैन साहित्य है।पुराण परम्परा के अनुसार वैवस्वत मनु की पुत्री ऐला -पुरुरवा चन्द्रवंश के संस्थापक थे तथा ययाति के परदादा थे , जो एक प्रसिद्ध सम्राट

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The glorious historical account of the Lunar race Yadu Rajputs —

The glorious historical account of the Lunar race Yadu Rajputs — Yadus /Jadus  ,Yadavas/ Jadhavas, Yaduvansis,Jaduvansis  ,Yadu-Bhatti ,Jadeja, Jadon /Jadaun Rajput’s  Origin History   —– Chandravansh (Somavansha /Induvansha)—– The Lunar race.—- The lineage or race which claims descent from the moon. It is divided into two great branches, the Yadavas and Pauravas, respectively , descended from

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The Ancient Yadavas /Yaduvansis Lunar race Kshatriya’s(modern Jadon /Jadaun ) of Bayana and Tribhuvangiri —-

The Ancient Yadavas /Yaduvansis of  Lunar race Kshatriyas (modern Jadon /Jadaun ) of Bayana( Santipur /Sripatha) andTribhuvangiri(Tahangarh /Timangarh /Thangarh)——- The Jadons Kshatriyas ,of course ,claim descent from Krishna,the acknowledged Lord of Mathura after the death of Kansa.Their early history ,therefore ,consists of a number of the popular tales of Krishna derived from the Mahabharta and the Puranas. Some

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Yadu -Vansh History — ( Puranic Yadavas or Modern Jadons ) Lunar race Dynasty of Kshatriyas

Yadu -Vansh History —  ( Puranic Yadavas or Modern Jadons ) Lunar race  Dynasty  of Kshatriyas— Yadu ,the Progenitor of the Jadon clans Panini ( C.500B.C ) in this Ashtadhyayi mention some of the Yadu clans and their polity.The unable among them are the Vrsni-Andhkas (VI.2.34.) who are referred in the connection with the Rajanya

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