अलीगढ़ जिले के विस्मृत जादौन राजपूत स्वतंत्रता संग्राम सैनानी—

अलीगढ़ जिले के विस्मृत जादौन राजपूत अमर स्वतन्त्रता संग्राम सैनानी — 1-पाली रजापुर गांव के अमर स्वतंत्रता संग्राम सैनानी—- अलीगढ़ जिले के समस्त गांवों में सबसे अधिक स्वतंत्रता सैनानी पैदा करने का गौरव जादौन ठाकुरों के गांव पाली रजापुर को प्राप्त है।इससे यह बात भी सिद्ध होती है कि उस समय पाली रजापुर शिक्षा के […]

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उत्तरप्रदेश के हाथरस जिले में जादवा /जदुवंशी / जादों राजपूतों के गांव —–

उत्तरप्रदेश के हाथरस जिले में जादवा /जदुवंशी / जादों राजपूतों के गांव —– हाथरस ब्लाक— गंगचौली, नगला इमलिया , कैमहार ,सहजादपुर, देवीनगर , झींगुरा , तेहरा , हसायन ब्लाक— बनवारीपुर, नवलगढ़ गढ़ी , गोपालपुर, कानऊ, गंगापुर नगला पटरी , नवीपुर , सेहुरी , नगला उदैया , बाड़ी ,नगला देवरा , नगला कोरिया , मैदामई ,

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राजपूताना” शब्द के प्रयोग एवं राजपूताने के राजपूतों की गौरवगाथा का ऐतिहासिक शोध ——

“राजपूताना” शब्द के प्रयोग एवं राजपूताने के राजपूतों की गौरवगाथा का ऐतिहासिक शोध —— जिन्होंने राजपूताने की स्वाधीनता को अक्षुण्ण रखने के लिए आजन्म संघर्ष किया और अपनी मातृभूमि के लिए अनेक कष्टों को सहकर जिन्होंने देश में एक अपूर्व आदर्श स्थापित किया उन प्रातः स्मरणीय -वीर शिरोमणी   स्वतंत्रता के पुजारी ,क्षात्र धर्म के रक्षक

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Biodata of Dr Dhirendra Singh Jadaun

              RESUME of Dr Dhirendra Singh Jadaun Dr Dhirendra Singh Jadaun Permanent Address  Village-Larhota near Sasni. District-Hathras State-Uttar Pradesh Mobil No-09929363669 Date of Birth- Ist Nov.1967 Present Address– Home Add -238,Vigyan Nager ,Ranthambhor Road , Sawaimadhopur -322001 ,Rajasthan Official Address Dr Dhirendra Singh Jadaun Associate Prof in Soil Science Faculty of Agriculture

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बृजमंडल की देवी नरी -सेमरी मैया का ऐतिहासिक शोध —

बृजमंडल की देवी नरी -सेमरी मैया का ऐतिहासिक शोध — बृजमण्डल में छाता क्षेत्र के नरी -सेमरी गांव में विराजमान नरी- सेमरी देवी माँ का इतिहास। एक बड़ा मेला जिसे नवदुर्गा में गांव नरी -सेमरी में आयोजित किया जाता है जो चैत के महीने में अंधेरी पाख में आयोजित होता है ।यही पर्व कोसी क्षेत्र

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क्षत्रियों के लिए राजपूत शब्द के प्रयोग  का ऐतिहासिक शोध –

क्षत्रियों के लिए राजपूत शब्द के प्रयोग  का ऐतिहासिक शोध – राजपूत शब्द का उच्चारण करते ही “राजपुताना स्म्रति पटल पर तुरंत ही आ जाता है ।राजपुताना राजपूत जाति का मुख्य केंद्र था ।भारतवर्ष  के इतिहास में राजपूत जाति और राजपुताना का एक विशेष स्थान है ।इस समय भी राजपूत हिन्दुस्तान की वीर जातियों में

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आधुनिक हिंदी के अनूठे गद्य शिल्पी राजा लक्षमण सिंह जी जादों ठिकाना बजीरपुरा (आगरा) —–

आधुनिक हिंदी के अनूठे गद्य शिल्पी राजा लक्षमण सिंह जी जादों ठिकाना बजीरपुरा (आगरा) —– —–अंग्रेज सरकार के  कलक्टर ।10 से अधिक साहित्यिक भाषाओं के ज्ञानी ।कालिदास की कई रचनाओं के हिंदी में अनुवाद कर्ता ।कई पुस्तकों के लेखक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे राजा लक्ष्मण सिंह जी । भारतेंदु हरिश्चंद युग से पूर्व  की हिंदी

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उन्नीसौ के दशक में राजपूतों के शैक्षणिक विकास एवं सामाजिक उत्थान के अमर पुरोधा -राजा बलवंत सिंह जी अवागढ़—-

उन्नीसौ के दशक में राजपूतों के शैक्षणिक विकास एवं सामाजिक उत्थान के अमर पुरोधा -राजा बलवंत सिंह  जी अवागढ़—- 1- संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 19 अक्टूबर 1897ई0।    2- संस्थापक बलवंत राजपूत हाई स्कूल  ,1886ई0 -बलवंत राजपूत कॉलेज  वर्तमान में राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय ,आगरा । अवागढ़ राजपरिवार रॉयल जादौन राजपूत करौली राजवंश

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क्षत्रियों के नाम के साथ “सिंह”उपनाम लगाने का ऐतिहासिक शोध—-

क्षत्रियों /राजपूतों के नामांत  में “सिंह “शब्द लगाने का ऐतिहासिक शोध । यह जानना भी आवश्यक है कि क्षत्रियों (राजपूतों )के नामों के अंत में “सिंह “पद कब से लगने लगा ।नामों के अंत में लगाने के विषय में इस शब्द की उत्पत्ति कब हुई ,इतिहास मोन है ।”सिंह “संस्कृत का शब्द है ,जिसका अर्थहोता

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20 वीं सदी में राजा अवागढ़ सूरज पाल सिंह बहुमुखी -प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व —–

20 वीं सदी में राजा अवागढ़  सूरज पाल सिंह  बहुमुखी -प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व —– हमारा देश दिव्य -विभूतियों का जन्म -स्थान है ।यहाँ समय -समय पर ऐसे नर -रत्न महानुभाव उत्पन्न हुए है;जिन्होंने निज उदात्त -लोक -कल्याणकारी  -कार्यों द्वारा त्रस्त -मानव का संत्राण करके उसे संपन्न और सुखी बनाया है ।आधुनिक नव -भारत के

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