History

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़ —

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक  मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़— बयान से लगभग 23 कि.मी दक्षिण में एक उन्नत पर्वतशिखर पर मध्यकाल प्रसिद्ध दुर्ग ताहनगढ़  (तिमनगढ़) या त्रिभुवनगढ़ स्थित है। दुर्गम पर्वतमालाओं से आवृत , वन सम्पदा  से परिपूर्ण तथा नैसर्गिक सौन्दर्य से सुशोभित इस दुर्भेद्य दुर्ग की अपनी अदभुत निराली ही  शान […]

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यदुकुल शिरोमणि श्रीकृष्ण ,उनका समय एवं जदुवंशियों के विनाश का ऐतिहासिक अध्ययन–

यदुकुल शिरोमणि योगीश्, उनका समय एवं जदुवंशियों का विनाश— ब्रज या शूरसेन जनपद के इतिहास में श्रीकृष्ण का समय बड़े महत्व का है। इसी समय प्रजातंत्र और नृपतंत्र के बीच कठोर संघर्ष हुए, मगध-राज्य की शक्ति का विस्तार हुआ और भारत का वह महाभीषण संग्राम हुआ, जिसे महाभारत युद्ध कहते हैं। इन राजनैतिक हलचलों के

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श्री कृष्ण के वंशज यदुवंशी जादों क्षत्रियों के प्राचीन ऐतिहासिक नगर महावन (पौराणिक गोकुल ) का शोध–

श्री कृष्ण जी के वंशज यदुवंशी जादों क्षत्रियों के प्राचीन ऐतिहासिक नगर महावन (पौराणिक गोकुल) का शोध– यमुना पार मथुरा से 14 किमी दूर नीचे की और बहने वाली यमुना की धारा के किनारे पर बसे हुए वर्तमान गोकुल से 4 किलोमीटर आगे, मथुरा से सादाबाद सड़क के सहारे ऊंचे टीले पर सन्निविष्ट महाबन ऐतिहासिक

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मध्यकाल के वास्तविक (पौराणिक ) यादव क्षत्रियों (राजपूतों )का ऐतिहासिक शोध–

मध्यकाल के वास्तविक यादवा चन्द्रवंशी क्षत्रियों (राजपूतों ) का ऐतिहासिक शोध—– वास्तविक (पौराणिक )यादवा क्षत्रिय (राजपूत ) चंद्रवंश के ययाति के पुत्र यदु वंशधर हैं। मनु के चार पुत्रों इक्ष्वाकु, प्रांगु, सुद्युम्न तौर शर्वाति ने भारत में सबसे पहले आर्य -राज्य स्थापित किये । यह घटना लगभग 2000 ई. पूर्व की है। इक्ष्वाकु के वंश

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जादों राज्य करौली की ऐतिहासिक धरोहरें–

जादों राज्य करौली की ऐतिहासिक धरोहरें—– जादों राजपूतों के करौली राज्य में धार्मिक , प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों की अधिकता रही है।यहां लगभग एक दर्जन प्राचीन किले तथा चम्बल घाटी के समानान्तर फैला हुआ कैलादेवी अभयारण्य है जो यहाँ की विरासत है। यहाँ के प्राचीन भवनों में मुगल तथा राजपूत शैली की वास्तुकला एवं

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History of Lunar Race Chhonkarjadon Rajputs–

History of Lunar race Chhonkar Jadon Rajputs —- Ancestors of Chhonkar Jadon Rajputs— According to the study of  Karauli Jadon rajput history pothi and pothies of several Jadon clan Jagas of Akolpura thikana near Karauli and other places , the ancestors of Chhonkar rajputs are the Jadons of Bayana and Timangarh in Bharatpur district(presently  Karauli

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जदुवंशी बनाफर राजपूत वंश का ऐतिहासिक शोध–

जदुवंशी बनाफर राजपूत वंश का ऐतिहासिक शोध— हमारी इस पावन पवित्र वीरों के बलिदान की भारत भूमि का इतिहास किसी एक भू -भाग का ऋणी नही है ।प्राचीनकाल में अयोध्या ,मगध ,काशी ,मथुरा ,शक्ति केंद्र रहे तो बाद के वर्षों में उज्जैन ,पाटिलपुत्र शक्ति केंद्र बने ,इसके बाद मध्यकाल में दिल्ली ,कन्नोज ,पाटन फिर मेवाड़

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श्री कृष्ण के बाद मथुरा में पुनः जादों राजवंश की स्थापना एवं उसके संस्थापक श्री वज्रनाभ की पुनः शासन -सत्ता का ऐतिहासिक शोध —

   श्री कृष्ण के बाद   मथुरा  में पुनः  जादों-राजवंश  की स्थापना एवं उसके संस्थापक श्री वज्रनाभ  की पुनः शासन -सत्ता का ऐतिहासिक शोध— ” प्रभास क्षेत्र में हुए जदुवंश संहार के बाद द्वारिका से सुने ब्रज में प्रकाश-पुंज बनकर आये थे श्री कृष्ण के प्रपौत्र श्री वज्रनाभ ।इन्होंने ही निर्जन अवस्था में पड़ी हुई  ब्रजभूमि

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जदुवंशियों के प्राचीन राज्य शूरसेन प्रदेश के इतिहास का पौराणिक अध्ययन—–

जदुवंशियों के प्राचीन राज्य शूरसेन प्रदेश के इतिहास का पौराणिक अध्ययन —— वर्तमान मथुरा तथा उसके आस –पास का प्रदेश ,जिसे अब ‘ब्रज ‘ कहा जाता है ,प्राचीन काल में यह ‘शूरसेन प्रदेश या जनपद के नाम से प्रसिद्ध था |इसकी राजधानी मधुरा या मथुरा नगरी थी | शूरसेन जनपद आरम्भ से ही महाजनपद के

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जदुवंशियों के विविध वंश एवं उनके पौराणिक राज्यों का ऐतिहासिक शोध–

जदुवंशियों के विविध वंश एवं उनके पौराणिक राज्यों का ऐतिहासिक शोध —- ऐल-वंश के प्रतापी राजा ययाति जो भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट थे उनके पांच पुत्र थे , जिन सभी ने आर्य-जाति की शक्ति का दूर -दूर तक विस्तार किया , और अपने पृथक -पृथक राज्य स्थापित किये।ये पांचों -यदु ,तुर्वसु ,द्रुहा अनु और

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