Jadon’s History

बृजमंडल की देवी नरी -सेमरी मैया का ऐतिहासिक शोध —

बृजमंडल की देवी नरी -सेमरी मैया का ऐतिहासिक शोध — बृजमण्डल में छाता क्षेत्र के नरी -सेमरी गांव में विराजमान नरी- सेमरी देवी माँ का इतिहास। एक बड़ा मेला जिसे नवदुर्गा में गांव नरी -सेमरी में आयोजित किया जाता है जो चैत के महीने में अंधेरी पाख में आयोजित होता है ।यही पर्व कोसी क्षेत्र […]

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क्षत्रियों के लिए राजपूत शब्द के प्रयोग  का ऐतिहासिक शोध –

क्षत्रियों के लिए राजपूत शब्द के प्रयोग  का ऐतिहासिक शोध – राजपूत शब्द का उच्चारण करते ही “राजपुताना स्म्रति पटल पर तुरंत ही आ जाता है ।राजपुताना राजपूत जाति का मुख्य केंद्र था ।भारतवर्ष  के इतिहास में राजपूत जाति और राजपुताना का एक विशेष स्थान है ।इस समय भी राजपूत हिन्दुस्तान की वीर जातियों में

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आधुनिक हिंदी के अनूठे गद्य शिल्पी राजा लक्षमण सिंह जी जादों ठिकाना बजीरपुरा (आगरा) —–

आधुनिक हिंदी के अनूठे गद्य शिल्पी राजा लक्षमण सिंह जी जादों ठिकाना बजीरपुरा (आगरा) —– —–अंग्रेज सरकार के  कलक्टर ।10 से अधिक साहित्यिक भाषाओं के ज्ञानी ।कालिदास की कई रचनाओं के हिंदी में अनुवाद कर्ता ।कई पुस्तकों के लेखक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे राजा लक्ष्मण सिंह जी । भारतेंदु हरिश्चंद युग से पूर्व  की हिंदी

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उन्नीसौ के दशक में राजपूतों के शैक्षणिक विकास एवं सामाजिक उत्थान के अमर पुरोधा -राजा बलवंत सिंह जी अवागढ़—-

उन्नीसौ के दशक में राजपूतों के शैक्षणिक विकास एवं सामाजिक उत्थान के अमर पुरोधा -राजा बलवंत सिंह  जी अवागढ़—- 1- संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 19 अक्टूबर 1897ई0।    2- संस्थापक बलवंत राजपूत हाई स्कूल  ,1886ई0 -बलवंत राजपूत कॉलेज  वर्तमान में राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय ,आगरा । अवागढ़ राजपरिवार रॉयल जादौन राजपूत करौली राजवंश

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क्षत्रियों के नाम के साथ “सिंह”उपनाम लगाने का ऐतिहासिक शोध—-

क्षत्रियों /राजपूतों के नामांत  में “सिंह “शब्द लगाने का ऐतिहासिक शोध । यह जानना भी आवश्यक है कि क्षत्रियों (राजपूतों )के नामों के अंत में “सिंह “पद कब से लगने लगा ।नामों के अंत में लगाने के विषय में इस शब्द की उत्पत्ति कब हुई ,इतिहास मोन है ।”सिंह “संस्कृत का शब्द है ,जिसका अर्थहोता

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20 वीं सदी में राजा अवागढ़ सूरज पाल सिंह बहुमुखी -प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व —–

20 वीं सदी में राजा अवागढ़  सूरज पाल सिंह  बहुमुखी -प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व —– हमारा देश दिव्य -विभूतियों का जन्म -स्थान है ।यहाँ समय -समय पर ऐसे नर -रत्न महानुभाव उत्पन्न हुए है;जिन्होंने निज उदात्त -लोक -कल्याणकारी  -कार्यों द्वारा त्रस्त -मानव का संत्राण करके उसे संपन्न और सुखी बनाया है ।आधुनिक नव -भारत के

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ब्रजमंडल के गांव बन्दी में बिराजमान बन्दी-आनन्दी देवियों का ऐतिहासिक शोध–

ब्रजमंडल के गांव बंदी में विराजमान बंदी -आनंदी देवियों का ऐतिहासिक शोध ।    एक पौराणिक कथा के बारे में भ्रामक अर्थ समझने का बड़ा रोचक उदाहरण मथुरा जिले में बलदेव -राया मार्ग पर स्थित जादौन राजपूतों के बहुत बड़े एवं प्रसिद्ध गांव बंदी में मिलता है ।इस गांव में बंदी,आनंदी और मनोवांछा देवी का

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वही अर्जुन वही बाण ,कृष्ण की ललनाएँ आभीरनु क्यों लूटीं? –जानिए इस रहस्य को——–

वही अर्जुन वही बाण ,कृष्ण की ललनाएँ आभीरनु क्यों लूटीं? –जानिए इस रहस्य को——– क्यों नहीं कर सके गाण्डीव धारी अर्जुन (भगवान श्री कृष्ण के परम प्रिय सखा पार्थ)भगवान श्रीकृष्ण की 16100 रानियों सहित यदुवंश की बची हुई स्त्रियों की आभीरों से रक्षा और क्यों आभीरों ने उनको लूटा इस रहस्य की कथा कुछ इस

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करौली के जादवा/जदुवंशी /जादों राजपूतों का ऐतिहासिक दुर्ग उंटगिरी का इतिहासिक शोध

करौली राज्य के प्राचीन दुर्ग उतगिरि का ऐतिहासिक शोध एवं करौली के यदुवंशी जादौन राजपूतों का सिकन्दर लोदी से खूनी-संघर्ष—– करौली क्षेत्र में उतगिरि के किले को मध्यकालीन राजपूताने के विशाल दुर्गों में माना जाता है ।यह दुर्ग घने जंगल के भीतरी भाग में स्थित है ।दुर्ग के आस -पास कोई भी वस्ती की बसावट

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करौली राज्य के जादव /जदू /जादों क्षत्रियों के प्राचीन दुर्ग मंडरायल का गौरवमयी इतिहास —-

करौली राज्य के जादव /जदू /जादों क्षत्रियों के प्राचीन दुर्ग मंडरायल का गौरवमयी इतिहास —— ‎मंडरायल का दुर्ग पूर्व-मध्यकाल का एक प्रसिद्ध दुर्ग रहा है।यह किला मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के सीमांत प्रदेश पर स्थित है।चम्बल नदी के किनारे यह एक उन्नत पहाड़ी के शिखर भू-भाग पर स्थित है।इसका निर्माण लाल पत्थरों से हुआ है।यह वन

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