December 2021

दास्ताने पूर्व मध्यकालीन जादों राजवंश का बयाना (विजयमन्दिरगढ़ ) किला–

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करौली के जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य ,वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक है मध्यकालीन ऐतिहासिक दुर्ग तिमनगढ़ (ताहनगढ़ )—

करौली जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य , वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक  ऐतिहासिक मध्यकालीन  दुर्ग तिमनगढ़(ताहनगढ़)—- “अपनी बहुमूल्य सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर तथा यदुवंशियों के मुगलों से वीरतापूर्ण गौरवशाली  संघर्ष के इतिहास का प्रतीक है तिमनगढ़ /ताहनगढ़ दुर्ग “।इसे तत्कालीन इतिहासकारों एवं लेखकों ने विभिन्न नामों तमनगढ़ , त्रिभुवनगढ़ ,थंनगढ़ से वर्णित किया है

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मध्यकालीन जादों राजपूत दुर्ग तिमनगढ़ के गौरवशाली स्वर्णिम युग का ऐतिहासिक अध्ययन–

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पूर्व-मध्यकालीन ऐतिहासिक मंडरायल दुर्ग यदुवंशियों के शौर्य एवं वीरता का प्रतीक–

पूर्व मध्यकालीन मंडरायल दुर्ग यदुवंशियों के शौर्य एवं वीरता का प्रतीक  — मंडरायल दुर्ग ई0 1145 से 1423 ई0 तक यदुवंशी जादों राजवंश की राजधानी रहा ।यह दुर्ग चम्बल नदी की सीमा पर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। मंडरायल नगर  करौली जिला मुख्यालय  से 40 कि. मी. चम्बल नदी की सीमा पर दक्षिण पूर्व

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पुरातन सम्पदा का अमूल्य खजाना है जदुवंशियों की ऐतिहासिक धरोहर तिमनगढ़ दुर्ग–

पुरातन सम्पदा का अमूल्य खजाना है जदुवंशियों की ऐतिहासिक धरोहर तिमनगढ़ दुर्ग — जदुवंशी क्षत्रियों का मध्यकालीन यह तिमनगढ़ दुर्ग राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है । पाषाण की मूर्तियों के अमिट खजाने और हस्तशिल्प कला के बेजोड़ नमूनों के लिए तिमनगढ़ का किला प्रसिद्ध है। यह किला जिला मुख्यालय करौली से 40 किमी. की

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सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़ —

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक  मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़— बयान से लगभग 23 कि.मी दक्षिण में एक उन्नत पर्वतशिखर पर मध्यकाल प्रसिद्ध दुर्ग ताहनगढ़  (तिमनगढ़) या त्रिभुवनगढ़ स्थित है। दुर्गम पर्वतमालाओं से आवृत , वन सम्पदा  से परिपूर्ण तथा नैसर्गिक सौन्दर्य से सुशोभित इस दुर्भेद्य दुर्ग की अपनी अदभुत निराली ही  शान

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Tribe Jadons ,Jadus, Jadhvas (Hindi) ,the puranic Yadavas (sanskrit)Lunar Race Kshatriyas —

Tribe Jadons , Jadus , Jadhavas  (Hindi )   ‘ the Puranic Yadavas (Sanskrit ) lunar race kshatriyas —– A Tribe of lunar race rajputs and  descendants of Yadu  , the eldest son of Yayati and Devayani , a pastoral race of ancient India .The date of their arrival in India ia unknown .The Yadavas were

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यदुकुल शिरोमणि श्रीकृष्ण ,उनका समय एवं जदुवंशियों के विनाश का ऐतिहासिक अध्ययन–

यदुकुल शिरोमणि योगीश्, उनका समय एवं जदुवंशियों का विनाश— ब्रज या शूरसेन जनपद के इतिहास में श्रीकृष्ण का समय बड़े महत्व का है। इसी समय प्रजातंत्र और नृपतंत्र के बीच कठोर संघर्ष हुए, मगध-राज्य की शक्ति का विस्तार हुआ और भारत का वह महाभीषण संग्राम हुआ, जिसे महाभारत युद्ध कहते हैं। इन राजनैतिक हलचलों के

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